एल्फा लेवल में ही संभव है सही लक्ष्य निर्धारण योग'

 


              एल्फा लेवल में ही संभव है सही लक्ष्य निर्धारण योग' 



यदि हम पूरी तरह से एकाग्र होकर अपनी सारी ऊर्जा किसी कार्य में लगा दें तो सफलता अवश्य मिलेगी। कठिन से कठिन काम आसानी से कर सकेंगे। यह ठीक है। कि जिस बिंदु पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे वहीं हमारी सारी ऊर्जा भी एकाग्र होकर काम करने लगेगी। बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई गड्ढा खोदने पर आसपास का सारा पानी उसमें आकर इकट्ठा हो जाता है। एक कार्यक्रम में एक सज्जन लक्ष्य निर्धारण और उनकी प्राप्ति के लिए कुछ क्रियाएँ करवा रहे थे। लोग एक-एक करके आते और गले से हू हा जैसी जोर की आवाज निकालते हुए । वहाँ रखी हुए ईंटों और टाइलों पर जोर से प्रहार करते। इस प्रक्रिया में सभी अपनी ताकत एक साथ लगा रहे थे और ईंटे और। टाइलें तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। कुछ ये कार्य आसानी से कर पा रहे थे तो कुछ असफल भी हो रहे थे। जो लोग पूरी एकाग्रता । के साथ एक बार में ही अपनी पूरी शक्ति लगाकर ईंटे और टाइलें तोड़ने का प्रयास कर रहे थे केवल वे लोग ही सफलता प्राप्त कर पा रहे थे। कार्यक्रम का संदेश यही था कि यदि हम पूरी तरह से एकाग्र होकर अपनी सारी ऊर्जा किसी कार्य में लगा देते हैं तो सफलता अवश्य मिलेगी। मुश्किल से मुश्किल काम हम आसानी से कर सकेंगे। यह ठीक है कि हम जिस बिंदु पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे वहीं हमारी सारी ऊर्जा भी एकाग्र होकर काम करने लगेगी। बिल्कल वैसे ही जैसे कोई गडढा खोदने पर आसपास का सारा पानी उसमें आकर इकट्ठा हो जाता है। मैंने प्रश्न किया कि जहाँ तक मेरी जानकारी । और अनुभव है लक्ष्य निर्धारण और उनकी प्राप्ति के लिए मन की गहरी अवस्था अपेक्षित है. और वह भी एल्फा अवस्था में और टेन साइकिल्स प्रति सैकेंड पर। फिर इतने शोर की अवस्था अर्थात् बीटा लेवल से भी ऊपर की अवस्था में यह कैसे संभव है? उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर देने में असमर्थता प्रकट की और मझसे ही इस प्रश्न का उत्तर देने को कहा लेकिन उस टिन प्रये स्वयं इसका उन्नत जात नहीं था। इसके कुछ समय बाद वही सज्जन कुछ स्कूली बच्चों को लेकर लक्ष्य निर्धारण और उनकी प्राप्ति के लिए फायर वॉक करवा । रहे थे। फायर वॉक करवाने के भी एक उद्देश्य । होता है। अंगारों पर चलना एक मुहावरा भी है। अंगारों पर चलना सरल नहीं होता। यदि । कोई व्यक्ति अंगारों पर चल सकता है तो वह । कठिन से कठिन कार्य बड़ी सरलता से कर सकता है। फायर वॉक के बाद किसी बच्चे अथवा बडे व्यक्ति में आत्म विश्वास बढ़ । जाना स्वाभाविक है लेकिन इसमें पैर बिल्कुल नहीं जलने चाहिएँ। यह एक वैज्ञानिक तथ्य है कि हम केवल का कुछ सैकेंड के लिए ही आग अथवा बहुत गरम वस्तु के संपर्क में रह सकते हैं अथवा उसे छू सकते हैं। यदि ज्यादा देर आग अथवा बहुत गरम वस्तु के संपर्क में आएँगे तो जलना अथवा झुलसना निश्चित है। फायर वॉक करवाने का उद्देश्य भी यही है कि जिस प्रकार से हम एक निश्चित समय में सावधानीपूर्वक व शीघ्रता से आग जैसी चीज को पार कर सकते हैं उसी प्रकार से जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी यदि हम समय का ध्यान रखें व सावधानीपूर्वक तथा शीघ्रता से कार्य करें तो सफलता निश्चित है। उपरोक्त फायर वाक में कुछ बच्चों के पैरों के तलवे जल गए और इस घटना पर काफी हो-हल्ला भी मचा और शांत हो गया पर मेरे मन में द्वंद्व बढ़ गया। मैं इसका कारण जानने के लिए बेचैन हो उठा। इस दिल्लीघटना के कछ दिनों बाद एक दिन मेरा एक मंदिर में जाना हआ। वहाँ बहत भीड थी। लाइन आगे सरकने का नाम ही नहीं ले रहा थी। कछ उत्साही श्रद्धालुओं ने नारे लगाने • सीताराम गुप्ता शुरू कर दिए। बोलो शेरों वाली माता की जय। वहाँ तैनात पुलिस कर्मियों ने फौरन श्रद्धालुओं को नारे लगाने से रोक दिया। मैंने अनुभव किया कि नारा लगाते ही भीड़ में एक उत्तेजना आ गई थी। सभी को अपना लक्ष्य दिखला देने लगा और वह था मुख्य स्थल पर पहुँच कर मूर्ति के दर्शन करना। ऐसे में प्रायः भगदड़ मच जाती है और कमजोर लोग, महिलाएँ व निर्दोष बच्चे मारे जाते हैं। आजकल विभिन्न तीर्थस्थलों अथवा विशाल आयोजनों में ऐसी स्थिति देखने में आती है, जिससे भयंकर दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। कहीं पर भी भीड़ जब विरोधस्वरूप नारे लगाते हुए गुजरती है तो वह विध्वंसक हो जाती है। उत्तेजना, क्रोध अथवा गुस्से की , अवस्था में सही निर्णय करना अथवा संकल्प लेना संभव ही नहीं। इसी प्रकार से शांत अवस्था में गलत निर्णय करना अथवा संकल्प लेना संभव ही नहीं। उत्तेजना, उतावली, क्रोध, प्रतिशोध की भावना, चीख-चिल्लाहट, नारेबाजी आदि मन की अशांत अवस्थाओं में हम अपने विवेक का इस्तेमाल करने की योग्यता व क्षमता ही गंवा बैठते हैं। अतः सही संकल्प ले ही नहीं सकते। मन की शांत-स्थिर अवस्था में हमारा अवचेतन मन इस योग्य हो जाता है कि वह सही संकल्पों का चुनाव करके उन्हें पूर्णता की ओर अग्रसर कर सकें। ध्यान की अवस्था में लिए गए संकल्प न केवल सही होते हैं अपित उनकी पूर्णता में भी विलंब न टोना।